Skip to main content

Latest Astrology Updates in Hindi

Durga Ashtmi Ka Mahattw

दुर्गा अष्टमी कब है April 2025 में,  पढ़िए महा-अष्टमी से सम्बंधित प्रथाएं, क्या करे बेहतर जीवन के लिए, durga ashtmi ki sahi tarikh.  Chaitra Navratri Durga-ashtmi 2025:   नवरात्री का आठवां दिन बहुत महत्त्व रखता है भक्तो के लिए. ये दिन महा-अष्टमी या फिर दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग विशेष प्रकार की पूजा पाठ करते हैं कुलदेवी, माँ काली, दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए. इस बार अष्टमी तिथि 4 तारीख शुक्रवार को रात्री में लगभग 8:15 PM से शुरू होगी और 5 तारीख को रात्री में लगभग 7:27 PM तक रेहगी तो उदया तिथि के अनुसार महाष्टमी की पूजा 5 तारीख शनिवार को होगी. Durga Ashtmi Ka Mahattw अगर कोई नवरात्री के बाकी दिनों में पूजा पाठ नहीं कर पाते हैं तो सिर्फ अष्टमी की पूजा से भी लाभ ले सकते हैं.  Listen MahaAshtmi Special Mantra महाष्टमी से सम्बंधित कई पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती है – कुछ के अनुसार इस दिन माँ काली का अवतरण हुआ था.  कुछ भरोसा करते है की इस दिन माता जी ने महिसासुर राक्षस का वध किया था.  Watch Video here ज्योतिष के...

Nada Yoga Dhyan Ke Fayde Aur Vidhi

नाद योग ध्यान क्या है, कैसे करे नाद योग ध्यान, क्या फायदे होते हैं इस ध्यान के, कैसे उर्जित करे अपने मन मस्तिष्क और शारीर को, जानिए ध्यान की अदभुत विधि.
नाद योग ध्यान क्या है, कैसे करे नाद योग ध्यान, क्या फायदे होते हैं इस ध्यान के, कैसे उर्जित करे अपने मन मस्तिष्क और शारीर को, जानिए ध्यान की अदभुत विधि.
Nada Yoga Dhyan Ke Fayde Aur Vidhi

इस लेख को शुरू करने से पहले ये बता दे की ये ध्यान विधि बहुत ही प्रभावकारी है और लोगो ने इस विधि का प्रयोग करके बहुत ही अश्चार्जनक बदलाव जीवन में महसूस किया है.
इस ध्यान विधि के बारे में जानने के लिए ये जरुरी है की हम खुद करे और महसूस करे इसकी शक्ति को. नाद योग ध्यान को रोज करने वाले बहुत सी परेशानियों से अनायास ही छुटकारा पा लेते हैं.
अगर इस ध्यान को रोज किया जाए तो हम एक स्वस्थ जीवन, संपन्न जीवन, सकारात्मक जीवन को जी सकते हैं.

क्या है नाद योग ध्यान ?

नाद योग भारत की अति प्राचीन ध्यान विधियों में से एक है जिसका प्रयोग यहाँ के ऋषि, मुनि, योग और जानकार लोग करते आये हैं. साधारणतः लोग इसका प्रयोग अध्यात्मिक उन्नति के लिए ही करते आये हैं परन्तु सच तो ये है की इस ध्यान के प्रभाव से संकल्प शक्ति विकसित हो जाती है और व्यक्ति सफलता पूर्वक जीवन भी जी सकता है.

आइये कुछ और जाने नाद योग के बारे में :

  • शारीर और मन के शुद्धिकरण में सहायक है नाद योग ध्यान.
  • शारीर में कुंडलिनी शक्ति को जगाने में भी सहायक है नाद योग ध्यान.
  • इसे नाद ब्रह्म साधना या फिर गुंजन योग के नाम से भी जाना जाता है.
  • इसको करने के कई तरीके है जो की विभिन्न प्रकार के साधक स्तेमाल करते हैं जरुरत के हिसाब से.
  • इसको करने के लिए किसी विशेष वास्तु की आवश्यकता नहीं है.

आइये जानते हैं नाद योग ध्यान  के विज्ञान को :

नाद का अर्थ है एक गूंज या फिर एक आवाज और योग का अर्थ है मिलना. अतः ये साधना का मुख्य उद्देश्य है हमारी चेतना को एक दिव्य गूँज के साथ मिला देना. अध्यात्मिक विज्ञान के हिसाब से हमारे अन्दर एक स्वतः नाद चलता रहता है और जो उसे सुन लेता है उसे फिर किसी और चीज की लालसा नहीं रहती है, ये नाद साधक को आनंदित कर देता है, उर्जा से भर देता है, अध्यात्मिक विकास करवाता है. 
जब साधक नाद योग का अभ्यास करता है तो धीरे धीरे उसका मन सूक्ष्म होता जाता है और वो अंतर नाद को भी सुनने लगता है.
लगातार ध्यान के अभ्यास से हम इस ब्रह्म नाद या फिर अनहद नाद को सुन सकते हैं.
अध्यात्मिक विज्ञान के हिसाब से नाद २ प्रकार के होते हैं:
  1. अहद
  2. अनहद
अहद नाद को किसी चीज या वास्तु के द्वारा पैदा किया जाता है परन्तु अनहद नाद को किसी वास्तु की जरुरत नहीं होती है. अनहद नाद सार्वभौमिक ध्वनि है परंतु इसे कानो द्वारा नहीं सुना जा सकता है. इसे सुनने के लिए गहरे ध्यान में जाना होता है. 
हमे अपने इन्द्रियों को अत्यंत सूक्ष्म करना होगा इस दिव्य संसार का अनुभव करने के लिए और शारीर के अन्दर की दुनिया को जानने के लिए. 
नाद योग के द्वारा कुछ अनसुलझे पहलु को जाना जा सकता है.
नाद योग ध्यान कोई भ्रम नहीं है, एक हफ्ते के लगातार अभ्यास के द्वारा हम इसकी शक्ति को अनुभव कर सकते हैं. 

आइये अब जानते हैं कैसे करे नाद योग ध्यान:

जैसा की हमने ऊपर पढ़ा की इसको करने के लिए किसी बहरी वास्तु की आवशयकता नहीं है. हम इस साधना को कहीं भी कर सकते हैं, किसी भी अवस्था में कर सकते हैं, किसी भी अवस्था में कर सकते हैं परन्तु शुरू में अगर एकांत स्थान का चुनाव करे तो इसके प्रभाव को महसूस करने में आसानी होगी.
  • सबसे पहले किसी आसान, आराम दायक आसन पर बैठ जाए. आप पद्मासन में या फिर सुखासन में बैठ सकते हैं.
  • अब अपने इष्ट या गुरु को याद करे और प्रणाम करके साधना की सफलता के लिए प्रार्थना करे.
  • करीब ५ मिनट तक गहरी सांस ले और गहरी सांस छोड़े और मन को एकाग्र करे.
  • अब अपने पुरे शारीर को ढीला छोड़ दे और आँखे बंद कर ले, कही भी तनाव न रहे.
  • अपने अपने अंगूठो से दोनों कानो को बंद करे और तर्जनी ऊँगली से आँखों को ढके.
  • अब एक गहरी सांस ले और अपना मूंह बंद रखते हुए ॐ की ध्वनि करे. अपने मन मस्तिष्क को इस ध्वनि में खो जाने दे. इस प्रकार लगतार करीब ३० मिनट तक नाद करते रहे और उसमे खो जाए, बाद में आप इस समय को बढ़ा भी सकते हैं.
Read About Tratak Kya Hota hai 

क्या फायदे होंगे नाद योग ध्यान  के द्वारा ?

इस ध्यान के सभी फायदों का वर्णन करना असंभव है परन्तु यहाँ हम इसके कुछ सांसारिक फायदे देखते हैं –
  1. नाद योग ध्यान के अभ्यास से हमारे शारीर के नाड़ी तंत्र खुलने लगते हैं. उर्जा सभी तरफ प्रवाहित होने लगता है.
  2. इसके अभ्यास से मन , मस्तिष्क और शारीर उर्जा से भर जाता है.
  3. शारीर और मन को शुद्ध करने में नाद योग बहुत सहायक होता है.
  4. पुरे शारीर के हर भाग में उर्जा प्रवाहित होने लगती है और हर भाग को जागृत कर देता है ये ध्यान.
  5. इससे स्मृति भी बढ़ने लगती है.
  6. इससे व्यक्ति अपनी सुन्दरता को भी बढ़ा सकता है. 
  7. नाद योग ध्यान  से इन्द्रियां सूक्ष्म होने लगती है और हम अपने अन्दर के सूक्ष्म संसार को भी जान सकते हैं.
  8. इसके अभ्यास से साधक प्रसन्न रहने लगता है, शांति से रहने लगता है.
  9. इसके द्वारा कुंडलिनी शक्ति को भी जगा सकते हैं.
अतः अपने जीवन को सफल बनाने के लिए  शुभ महुरत से इस नाद योग ध्यान  को करना शुरू करे.

और साधना सम्बंधित लेख पढ़े:
Nad yoga meditation in english

नाद योग ध्यान क्या है, कैसे करे नाद योग ध्यान, क्या फायदे होते हैं इस ध्यान के, कैसे उर्जित करे अपने मन मस्तिष्क और शारीर को, जानिए ध्यान की अदभुत विधि.

Comments

Popular posts from this blog

Kuldevi Strotram Lyrics

Kuldevi Strotram Lyrics, कुलदेवी स्त्रोत्रम पाठ के फायदे, कुलदेवी का आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें, कुलदेवी को प्रसन्न करने का शक्तिशाली उपाय | हिन्दुओं में कुलदेवी या कुलदेवता किसी भी परिवार के मुख्य देवी या देवता के रूप में पूजे जाते हैं और ये उस परिवार के मुख्य रक्षक भी होते हैं | किसी भी विशेष कार्य को करने से पहले कुलदेवी या कुलदेवता को पूजने की मान्यता है |  आज के समय में बहुत से परिवारों को उनके कुलदेवी या कुलदेवता का पता नहीं होता है अतः ऐसे में चिंता की बात नहीं है| कुलदेवी स्त्रोत्रम का पाठ करके और सुनके हम अपने कुलदेवी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं |  Kuldevi Strotram Lyrics सुनिए YouTube में कुलदेवी स्त्रोत्रम  Lyrics of Kuldevi Strotram:  ॐ नमस्ते श्री  शिवाय  कुलाराध्या कुलेश्वरी।   कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1   वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।   वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।2   आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।   विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।।3   त्रैलोक...

Bank Account kab khole jyotish anusar

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बैंक खाता कब खोलें, बैंक खाता खोलने के लिए सबसे अच्छा दिन चुनकर सौभाग्य कैसे बढ़ाएं,  when to open bank account as per astrology ,  ज्योतिष के अनुसार बैंक खाता खोलने का शुभ दिन, नक्षत्र और समय, ज्योतिष के अनुसार बचत कैसे बढ़ाएं? बैंक खाता खोलने का निर्णय एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय है और इसलिए इसे खोलने के लिए सबसे अच्छा दिन, सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र, सर्वश्रेष्ठ महुरत चुनना अच्छा होता है । शुभ समय पर खोला गया बैंक खाता व्यक्ति को आसानी से संपन्न बना देता है |  बिना प्रयास के सफलता नहीं मिलती है अतः अगर हमे सफल होना है ,धनाढ्य बनना है, अमीर बनना है तो हमे सभी तरफ से प्रयास करना होगा, हमे स्मार्ट तरीके से काम करना होगा |  प्रत्येक व्यवसाय या कार्य में बैंक खाता आवश्यक है। चाहे आप एक कर्मचारी या उद्यमी हों चाहे आप एक व्यवसायी हों या एक गैर-कामकाजी व्यक्ति, बैंक खाता आमतौर पर हर एक के पास होता है। बैंक खाता हर एक के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हम इस पर अपनी बचत रखते हैं, यह इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक लेनदेन बैंक खाते के माध्यम...

Mahakal Kawacham || महाकाल कवच

महाकाल कवच के बोल, महाकाल कवचम के क्या फायदे हैं। Mahakal Kavacham || Mahakaal Kavach || महाकाल कवच || इस लेख में अति गोपनीय, दुर्लभ, शक्तिशाली कवच के बारे में बता रहे हैं जिसे की विश्वमंगल कवच भी कहते हैं। कवच शब्द का शाब्दिक अर्थ है सुरक्षा करने वाला | जिस प्रकार एक योद्धा युद्ध में जाने से पहले ढाल या कवच धारण करता है, उसी प्रकार रोज हमारे जीवन में नकारात्मक्क शक्तियों से सुरक्षा के लिए महाकाल कवच ढाल बना देता है | जब भी कवच का पाठ किया जाता है तो देविक शक्ति दिन भर हमारी रक्षा करती है |  कवच के पाठ करने वाले को अनैतिक कार्यो से बचना चाहिए, मांसाहार नहीं करना चाहिए, किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं करना चाहिए | Mahakal Kavach का विवरण रुद्रयामल तंत्र में दिया गया है और ये अमोघ रक्षा कवच है | Mahakal Kawacham || महाकाल कवच  किसी भी प्रकार के रोग, शोक, परेशानी आदि से छुटकारा दिला सकता है महाकाल कवच का पाठ | इस शक्तिशाली कवच के पाठ से हम बुरी शक्तीयो से बच सकते हैं, भूत बाधा, प्रेत बाधा आदि से बच सकते हैं | बच्चे, बूढ़े, जवान सभी के लिए ये एक बहुत ही फायदेमंद है | बाबा महाकाल ...