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Durga Ashtmi Ka Mahattw

दुर्गा अष्टमी कब है April 2025 में,  पढ़िए महा-अष्टमी से सम्बंधित प्रथाएं, क्या करे बेहतर जीवन के लिए, durga ashtmi ki sahi tarikh.  Chaitra Navratri Durga-ashtmi 2025:   नवरात्री का आठवां दिन बहुत महत्त्व रखता है भक्तो के लिए. ये दिन महा-अष्टमी या फिर दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग विशेष प्रकार की पूजा पाठ करते हैं कुलदेवी, माँ काली, दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए. इस बार अष्टमी तिथि 4 तारीख शुक्रवार को रात्री में लगभग 8:15 PM से शुरू होगी और 5 तारीख को रात्री में लगभग 7:27 PM तक रेहगी तो उदया तिथि के अनुसार महाष्टमी की पूजा 5 तारीख शनिवार को होगी. Durga Ashtmi Ka Mahattw अगर कोई नवरात्री के बाकी दिनों में पूजा पाठ नहीं कर पाते हैं तो सिर्फ अष्टमी की पूजा से भी लाभ ले सकते हैं.  Listen MahaAshtmi Special Mantra महाष्टमी से सम्बंधित कई पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती है – कुछ के अनुसार इस दिन माँ काली का अवतरण हुआ था.  कुछ भरोसा करते है की इस दिन माता जी ने महिसासुर राक्षस का वध किया था.  Watch Video here ज्योतिष के...

Bhagwan Shiv Ka Mahattw

शिव महिमा, शिवजी की पूजा का महत्त्व, क्या वस्तुएं प्रयोग होती है शिव पूजा में, कौन हैं भगवन भोलेनाथ, जानिए भोलेनाथ के परिवार को.

भारत भूमि दिव्य है और यहाँ पर विभिन्न देवी देवताओं की पूजा होती है. भारत भूमि का पुण्य इतना ज्यादा है की भगवान् भी अवतार के लिए इसी देश को चुनते आये हैं. देविक शक्तियों में से एक है भगवान् शिव जो सदेव संसार के कल्याण हेतु साधनारत रहते हैं. भगवन शिव निराकार है इसीलिए उनकी पूजा लिंग के रूप में की जाती है. ब्रह्माण्ड की उत्पाती से पहले भी शिव ही थे और उत्पत्ति के बाद भी वही है और विनाश के बाद भी वही रहेंगे.ये पूरा विश्व सिर्फ शिव का ही रूप है. हिन्दू मान्यता के अनुसार शिवरात्रि को भगवान् शिव का विवाह हुआ था इसीलिए ये दिन बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है.
shivji ki jaankari in hindi
Bhagwan Shiv Ka Mahattw

भक्तो ने भगवान् शिव की मूर्ति को कल्पना से बनाया है और उसकी पूजा करते हैं जिसमे उनकी जटाएं हैं, हाथ में त्रिशूल है, गले में नाग की माला है, चन्द्रमा भी उनके मुकुट की शोभा बढ़ाते हैं. शिव ही ऐसी शक्ति है जो की जहर को भी पचा लेते हैं. 

आइये जानते हैं की भगवान् शिव की पूजा में किन चीजो का प्रयोग होता है:

दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, मौसमी फल, आक के फूल, श्रीफल, ताम्बुल, इत्र, अक्षत, पंचमेवे धुप, दीप, धतुरा आदि. और अधिक पढ़िए >>

शिव पूजन का मंत्र है :

“”ॐ नमः शिवाय" 
  • भगवान् शिव के भक्तो के लिए कोई भी कार्य नामुमकिन नहीं होता है.
  • शिवजी सर्वशक्तिमान है, सर्वज्ञ है और सर्वा व्यापी है. इस ब्रह्माण्ड में कुछ भी शिव से जुदा नहीं है. वे सब जगह हैं, अन्दर हैं, बहार है, हर पल में हैं और वो हमारे कार्य के साक्षी हैं. 
  • हर संकटों से बहार आने का सबसे आसान तरीका है “शिव पूजा”. उनकी कृपा से साधक धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त करता है. 
  • जब साधक ध्यान में शिव को प्रकाश के रूप में अपने अंतर में देखता है तो उसके इस जीवन का हेतु पूर्ण हो जाता है. हर कोई भोलेनाथ को अपने ह्रदय में देख सकता है, उन्हें महसूस कर सकता है. 

कौन है भगवान् शिव?

हिन्दू मान्यता अनुसार 3 मुख्या शक्तियों को माना गया है , ब्रह्मा, विष्णु और महेश. भगवान् शिव इन्ही 3 शक्तियों में से एक हैं जो की मोक्ष के प्रदाता है. शिव से जुड़े ग्रंथो में लिखा है की इस ब्रह्माण्ड का कण कण शिव ही है. शिव की अलग अलग रूपों में अपने आपके प्रकट करते हैं.
  • योगी जन ध्यान में शिव का ही साक्षात्कार करते हैं. 
  • भक्तगण विभिन्न रूपों में शिव की आराधना करते हैं जैसे नटराज, महाकाल, अघोर, योगिराज, रूद्र आदि. 
  • शिव का पंचाक्षरी मंत्र पुरे विश्व में प्रसिद्द है. 
  • इनका महामृत्युंजय मंत्र भी बहुत शक्ति शाली है जिसका प्रयोग अकाल मृत्यु से बचाता है, रोग से बचाता है, आदि. 
  • इनके रूद्र मंत्रो का जप समस्त सुख सुविधाओं को प्रदान करता है. 

आइये जानते हैं भगवान् शिव के परिवार के बारे में :

इनकी अर्धागिनी साक्षातशक्ति है जिन्हें हम पार्वती/गौरी, आदि शक्ति, दुर्गा आदि के नाम से जानते हैं. भगवान् कार्तिके और गणेशजी इनके पुत्र हैं. नंदी भी इनके बहुत नजदीक हैं और वे हमेशा उनकी सेवा में लगे रहते हैं. इनको भी हम इनके परिवार में ही मानते हैं, ये सभी गणों को नियंत्रित करते हैं. 
“शिव पुराण” में इनकी सारी कहानियां दी गई हैं.
Shivji ka rahasyamay mandir, शिव और पार्वती कहाँ खेलते हैं चौसर, भारत मे कहाँ शिव और पार्वती रोज आते हैं |

Shiv aur parwati chausar kaha khelte hain: कुल मिला के 12 प्रसिद्द ज्योतिर्लिंग है भारत मे जहाँ भक्त भगवन शिव का आशीर्वाद लेने जाते हैं | परन्तु इस सबमे एक ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो की अद्भुत है क्यूंकि यहाँ पर मान्यता के अनुसार आज भी रोज रात्री को भगवन शिव और पार्वती चौसर खेलने आते हैं |

Shivji ka rahasyamay mandir, शिव और पार्वती कहाँ खेलते हैं चौसर, भारत मे कहाँ शिव और पार्वती रोज आते हैं |
Shivji ka rahasyamay mandir

इस मंदिर में रोज रात्रि को पुजारीजी चौसर बिछा के जाते हैं परन्तु जब सुबह आते हैं तो वो चौसर बिखरा हुआ मिलता है, यही इस बात को साबिन करता है की भागन शिव और माता पर्वाती रोज इस मंदिर में आते हैं |

Shiv aur parwati chausar kaha khelte hain: आइये जानते हैं की कहाँ पर ये मंदिर स्थित है ?

मध्य प्रदेश के निमाड़ में खंडवा के पास स्थित है ओंकारेश्वर मंदिर जो की नर्मदा तट पे बसा हुआ है | ये मंदिर नर्मदा नदी के बीच एक दिव्य पर्वत पर बसा हुआ है , इस पर्वत की खास बात ये है की ये पर्वत ओमकार के रूप में बना हुआ है और इस पर्वत की परिक्रमा जब कोई करता है तो वो ॐ के अकार में होती है |

इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि यहाँ हर रोज भगवान शिव और माता पार्वती आकर चौसर-पांसे खेलते हैं और यह सिलसिला सदियों से चला आ रहा हैं।

ऐसी मान्यता है की सारे तीर्थ करने के बाद ओम्कारेश्वर में दर्शन करना और जल चढ़ाना जरुरी होता है तभी सरे तीर्थ का फल प्राप्त होता है | इसीलिए यहाँ पे लोग दूर दूर से आते हैं और बाबा के दर्शन करते हैं |

तीर्थ यात्री विभिन्न पवित्र नदियों का जल लाके ओंकारेश्वर में बाबा को चढाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं |

स्कंद पुराण, शिवपुराण व वायुपुराण में ओंकारेश्वर का महत्त्व बताया गया है | ये एक तपः स्थली है इसीलिए ओंकार पर्वत की परिक्रमा में हमे ढेरो आश्रम दिखेंगे जहाँ पे आज भी संत साधनारत हैं |

omkareshwar mandir
omkareshwar


ये एक मात्र स्थान है जहाँ पे भोलेनाथ माँ पार्वती के साथ रात्रि को चौसर खेलते हैं |

रात्रि को शयन आरती के बाद इस मंदिर में चौसर को सजा दिया जाता है और कपाट बंद कर दिए जाते हैं और जब सुबह कपाट खुलते हैं तो पासे पलते हुए दीखते हैं |

यहाँ पर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है जिनकी भी बहुत मान्यता है | अतः अगर आप ओंकारेश्वर आते हैं तो एक तो ओंकार पर्वत की परिक्रमा जरुर करें और साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी जरुर करें |

Shiv aur parwati chausar kaha khelte hain: ओम्कारेश्वर मंदिर में 5 महादेव के रूप स्थापित हैं :

  1. सबसे पहले हमे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन होंगे |
  2. दूसरी मंजिल में हमे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन होंगे |
  3. तीसरी मंजिल पे आपको सिद्धनाथ महादेव के दर्शन होंगे |
  4. चौथी मंजिल पे हमे गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन होंगे |
  5. पांचवी मंजिल पे राजेश्वर महादेव के दर्शन होते हैं |

जानकारी के अनुसार ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को देवी अहिल्याबाई ने बनवाया था।

जानकारी के अनुसार ओंकार क्षेत्र में 68 तीर्थ हैं और यहां 33 कोटि देवता परिवार सहित निवास करते हैं |

Shivji ka rahasyamay mandir, शिव और पार्वती कहाँ खेलते हैं चौसर, भारत मे कहाँ शिव और पार्वती रोज आते हैं |

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