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Surya Ka kark Rashi Mai Gochar Ka Fal

Surya ka kark rashi mai gochar kab hoga 2026, सूर्य का गोचर कर्क राशि में, क्या असर होगा 12 राशियों पर, Rashifal in Hindi Jyotish. Surya Ka kark Rashi Mai Gochar:  वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रह है क्योंकि इसके राशि परिवर्तन से मौसम में, लोगों के जीवन में, राजनीति में बड़े बदलाव होने लगते हैं। सूर्य हर महीने राशि बदलता है और उसके अनुसार हमारे जीवन में भी बदलाव होते रहते हैं। सूर्य 16 जुलाई, 2026 को भारतीय समय के अनुसार  रात्री में  लगभग  11:25 बजे कर्क राशि में गोचर करेंगे । यहाँ ये  बुध और गुरु के साथ युति करेंगे. कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर महत्वपूर्ण है। इस समय के दौरान, कर्क राशि के लोग अधिक भावुक और सहज महसूस कर सकते हैं, और वे अपने  आप के साथ अधिक संपर्क में रह सकते हैं। वे दूसरों का अधिक पोषण करने वाले और देखभाल करने वाले भी हो सकते हैं। यह गोचर अन्य राशियों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि सूर्य एक शक्तिशाली ग्रह है जो सकारात्मक ऊर्जा और अवसर लाने में मदद करता है।  Surya Ka kark Rashi Mai Gochar Surya Ka kark R...

Swadhishtan Chakra Ke Jagrut Hone Par Kya Hota Hai

 स्वधिस्थान चक्र के जागने पर क्या होता है, swasdhisthan Chakra Ke Jagrut Hone Par kya hota hai| 

मूलाधार चक्र के बाद जो दूसरा शक्ति केंद्र है हमारे शरीर में वो है स्वाधिष्ठान चक्र | इस लेख में हम जानेंगे की  swadhisthan chakr ko jaagrut karne ke kya fayde hote hain ?, स्वाधिष्ठान चक्र कितने दिनों में जागृत हो जाता है?, स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत कैसे किया जाता है?, क्या फायदे हैं, स्वाधिष्ठान चक्र का मंत्र कौन सा है, स्वाधिष्ठान चक्र कहां होता है, स्वाधिष्ठान चक्र का बीज मंत्र कौन सा है आदि | 

स्वाधिष्ठान चक्र को Sacral Chakra भी कहा जाता है |जब भी कोई साधक साधना शुरू करता है तो सबसे पहले उसे मूलाधार चक्र को जागृत करना पड़ता है और उसके बाद उसे स्वधिस्थान चक्र से होते हुए आगे बढ़ना होता है | 

स्वधिस्थान चक्र के जागने पर क्या होता है, swasdhisthan Chakra Ke Jagrut Hone Par kya hota hai|
Swadhishtan Chakra Ke Jagrut Hone Par Kya Hota Hai


स्वाधिष्ठान चक्र की जाग्रति से साधक में स्पष्टता बढती जाती है जीवन को लेके और व्यक्तित्व में विकास और भी  तेजी से होने लगता है | 

Swadhisthan chakra का सम्बन्ध जल तत्त्व से हैं | 

स्वाधिष्ठान चक्र के जागृत होने पर साधक में प्रसन्नता, निष्ठा, आत्मविश्वास और ऊर्जा देखने को मिलती है | 

इस चक्र में अगर उर्जा की कमी हो तो साधकमें  आलस्य, भय, संदेह, प्रतिशोध, ईर्ष्या और लोभ देखने को मिलते हैं, इस चक्र के कमजोर होने पर व्यक्ति भोगी ही बना रह जाता है परन्तु भोगो को भी सही तरीके से भोग नहीं पाता है |

 इसीलिए स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत करना सभी के लिए जरुरी है वो भले ही भौतिक जीवन का आनंद लेना चाहता हो या फिर अध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ना चाहता हो | 

Read in English about Benefits of activating Swadhisthan chakra/sacral energy center

आइये जानते हैं क्या क्या फायदे होते हैं स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत करने के ?

  1. साधक जल तत्त्व को गहराई से समझने लगता है |
  2. साधक में गजब की स्फूर्ति उत्पन्न होने लगती है |
  3. अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्साह उतपन्न होने लगता है और वो और अधिक गहराई से अभ्यास करने लगता है | 
  4. जीवन के प्रति एक नई दृष्टि साधक को मिलती है | 
  5. उच्च स्तरीय साधक इसी चक्र पर धारणा करके जल पर चलने की शक्ति भी हासिल कर लेते हैं |
  6. साधक के अन्दर से क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास जैसे तमाम दुर्गुणों का नाश होने लगता है दूसरे शब्दों में हम ये कह सकते हैं की ये चक्र शारीरिक वासनाओं से आजादी दिलाती है जिससे साधक बहुत ही हल्का और शुद्ध महसूस करने लगता है | उसका मन और ज्यादा केन्द्रित और शक्तिशाली होने लगता है | 

हमारे शरीर में सबसे ज्यादा जल तत्त्व होता है इसीलिए इस चक्र को नियंत्रित करना बहुत जरुरी है जिससे की साधक अनेक प्रकार के रोगों से बच जाता है |

स्वाधिष्ठान चक्र का मंत्र कौन सा है ?

Swadhisthan Chakr पे ध्यान करने के लिए वं/VAM मन्त्र का प्रयोग किया जाता है |  सुनिए इस मन्त्र को You Tube में 

स्वाधिष्ठान चक्र का स्थान कहा हैं ?

योग ग्रंथो के अनुसार swasdhisthan chakra का स्थान नाभि और मूलाधार चक्र के बीच में हैं | 

और सरलता से समझे तो हम कह सकते हैं की इस शक्ति चक्र का स्थान नाभि से 2 इंच नीचे है |

स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत करने के तरीके क्या है ?

इस शक्ति केंद्र को कई तरीके से जागृत किया जा सकता है जैसे –

  • वं मंत्र का जाप करते हुए स्वाधिष्ठान पर ध्यान करते जाए, इससे ये क्षेत्र जागृत होने लगता है |
  • हम नारंगी रंग पर ध्यान करके भी स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत कर सकते हैं | 
  • वैसे कुंडलिनी साधना करने वाले साधको को इसे अलग से जागृत करने का अभ्यास नहीं करना पड़ता है क्यूंकि जब कुंडली जागृत होती है तो वो इस चक्र से सभी गुजरेगी और स्वाधिष्ठान चक्र की शक्तियों को पूरी तरह से जागृत कर देंगी | 
  • शक्तिचालन क्रिया का अभ्यास करते रहिये | पढ़िए शक्तिचालिनी मुद्रा क्या होती है ?

अनेक प्रकार की बीमारियों से भी साधक बच सकता है इस swdhisthan chakr को जागृत करके जैसे –

  • संतान सम्बन्धी समस्या से छुटकारा मिलता है अर्थात साधक अच्छी संतान पैदा करने के काबिल होता है |
  • मूत्र सम्बन्धी समस्याओ से साधक बचता है |
  • पेट से सम्बन्धी समस्याओ से साधक बचता है |
  • गुप्तांगो की कम्ज्जोरी ख़त्म होती है |

किन नियमो का पालन करना होता है स्वधिस्थान चक्र को जागृत करने के लिए ?

  • आपको सबसे पहले साधने के प्रति इमानदारी रखनी होगी अर्थात आपको रोज नियम से निश्चित समय पर ध्यान करने की आदत डालनी होगी |
  • अपने अन्दर साहस भी बनाए रखें क्यूंकि चक्र ध्यान के दौरान कुछ ऐसे अनुभव होते हैं जिसके बारे में आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी |
  • शुद्ध और सात्विक भोजन करें जिससे कब्ज न होने पाए|
  • किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहे क्यूंकि ध्यान का अपना एक नशा होता है अगर आप किसी प्रकार का नशा करेंगे तो आपको अपने शारीर के अन्दर मौजूद प्राकृत शक्तियों का अनुभव नहीं हो पायेगा |
  • रोज नियम से शक्तिचालन क्रिया, प्राणायाम और बंध का अभ्यास भी करें |
  • सूर्य नमस्कार जरुर करें, इससे आपको बहुत मदद मिलेगी |
  • सकारात्मक लोगो के साथ ही रहें | हो सके तो उन लोगो के संपर्क में रहें जो लोग कुंडलिनी साधना करते हैं |

Swadhisthan chakra kitne dino me jaagrut hota hai ?

इस प्रश्न का उत्तर ये है जब साधक मूलाधार चक्र को जागृत कर लेता है तो फिर अपने आप ही स्वधिस्थान चक्र जागृति होने लगती है | पढ़िए मूलाधार चक्र के जागने पर क्या होता है ?

एक बात ध्यान रखें की कुंडलिनी शक्ति महा शक्ति है और इन्हें जगाने से पहले हमे तन और मन से पूरी तरह स्वस्थ रहना होगा | 

तो आप सब को अब ये पता चल गया होगा की क्या होता है जब स्वाधिष्ठान जागृत होता है?

तो आइये अपने जीवन को सफल बनाने के लिए करते हैं कुंडलिनी ध्यान |

स्वधिस्थान चक्र के जागने पर क्या होता है, swasdhisthan Chakra Ke Jagrut Hone Par kya hota hai|

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